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नई दिल्ली: सरकार ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी (एलईसी) में अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। इस घोषणा का असर मंगलवार को शेयर बाजार में तुरंत देखने को मिला और कंपनी का शेयर शुरुआती कारोबार में 7% से ज्यादा टूट गया। दोपहर तक शेयर करीब 8% की गिरावट के साथ 393.40 रुपये पर पहुंच गया, जबकि कारोबार के दौरान यह 390.50 रुपये के निचले स्तर तक फिसल गया। सरकार यह हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिए बेचेगी।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सचेंज में दी गई जानकारी के अनुसार भारत सरकार ओएफएस के जरिए एलईसी में 6.5% तक हिस्सेदारी बेचेगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कंपनी में न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) से जुड़े नियामकीय नियमों को पूरा करना है। देश के बाजार नियामक ने एलईसी को 16 मई 2027 तक कम से कम 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग सुनिश्चित करने की मंजूरी दी है। यदि यह ऑफर पूरी तरह सफल रहता है तो कंपनी की पब्लिक शेयरहोल्डिंग मौजूदा 3.5% से बढ़कर 10% हो जाएगी।

ओएफएस में क्या होगा, कितनी तय हुई शेयर की कीमत?

एलईसी के ओएफएस में 2% इक्विटी हिस्सेदारी का बेस ऑफर रखा गया है। इसके अलावा सरकार के पास अतिरिक्त 4.5% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी रहेगा। यह ऑफर मंगलवार को नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए और बुधवार को रिटेल निवेशकों के लिए खुलेगा।

सरकार ने ओएफएस के लिए 382 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। इस कीमत पर 6.5% हिस्सेदारी का कुल मूल्य करीब 314.1 अरब रुपये बैठता है। डिसइन्वेस्टमेंट सेक्रेटरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि इस बिक्री से एमपीएस के लक्ष्य समय से पहले हासिल करने में मदद मिलेगी।

2022 के आईपीओ के बाद पहला डिसइन्वेस्टमेंट

एलईसी मई 2022 में देश के सबसे बड़े आईपीओ में से एक के जरिए शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई थी। उस समय सरकार ने कंपनी में 3.5% हिस्सेदारी बेची थी। मौजूदा ओएफएस, लिस्टिंग के बाद एलईसी में सरकार का पहला डिसइन्वेस्टमेंट होगा।

यह बिक्री ऐसे समय हो रही है जब केंद्र सरकार अपने विनिवेश कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रही है। सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 800 अरब रुपये के विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन का लक्ष्य रखा है। इस साल अब तक सरकार 212 अरब रुपये जुटा चुकी है। इसमें एनएचपीसी, कोल इंडिया और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (आईआरएफसी) जैसी कंपनियों में ओएफएस के जरिए हिस्सेदारी बिक्री भी शामिल है।

शेयर में भारी गिरावट क्यों आई?

सरकार की हिस्सेदारी बिक्री की घोषणा के बाद निवेशकों ने तेजी से मुनाफावसूली की, जिससे एलईसी के शेयर में तेज दबाव देखने को मिला। मंगलवार को शेयर करीब 8% टूटकर 393.40 रुपये पर आ गया और कारोबार के दौरान 390.50 रुपये के निचले स्तर तक पहुंच गया।

बड़ी कंपनियों के वित्तीय नतीजों में कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद मुनाफा घट जाता है। ऐसे मामलों में कंपनी की लागत, खर्च और अन्य वित्तीय कारण अहम भूमिका निभाते हैं। इसी तरह, किसी कंपनी में हिस्सेदारी बिक्री जैसी बड़ी कॉरपोरेट घोषणाएं भी शेयर की कीमत पर तत्काल असर डाल सकती हैं।

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