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नई दिल्ली: रुपया मंगलवार को कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले 96.60 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक टूटने के बाद अंत में 96.52 (अस्थायी) पर बंद हुआ। यह इसका सबसे निचला बंद स्तर है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक जोखिम से बचाव की प्रवृत्ति, मजबूत डॉलर से घरेलू मुद्रा पर दबाव है। रुपया 2026 में एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है। इस महीने अबतक इसमें 1.5 प्रतिशत और इस साल सात प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से निर्यात और खाड़ी देशों से आयात में बाधा आने के कारण रुपये की स्थिति अब भी ‘नाजुक’ बनी हुई है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 96.38 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान 96.60 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक टूटने के बाद अंतः में यह 96.52 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा जो पिछले बंद भाव से 32 पैसे की गिरावट है।

रुपया सोमवार को अब तक के सबसे निचले स्तर 96.20 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘ हमारा अनुमान है कि मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी के कारण रुपया गिरावट में रह सकता है...हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक के किसी भी हस्तक्षेप और सोने-चांदी के आयात पर कुछ अंकुश रुपये को निचले स्तर पर सहारा दे सकते हैं।’’’

 

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