नई दिल्ली: रूपया मंगलवार को सात पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.97 (अस्थायी) के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। धातु आयातकों से डॉलर की मजबूत मांग और लगातार विदेशी पूंजी की निकासी से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितता ने जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ा दिया है और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बनाए रखा है। इसके अलावा, विदेशी पूंजी की निकासी के कारण घरेलू शेयर बाजार में सुस्ती भी इसकी एक वजह रही।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 90.91 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.06 पर पहुंच गया। अंत में 90.97 (अस्थायी) प्रति डॉलर के अब तक के निचले स्तर पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से सात पैसे की गिरावट है।
रुपया सोमवार को 12 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.90 पर बंद हुआ था। रुपया इससे पहले 16 दिसंबर 2025 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.93 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘ वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति एवं विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की लगातार निकासी से रुपया नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करता रहा और कारोबार के दौरान 91 के स्तर से नीचे फिसल गया। हालांकि, कमजोर डॉलर और भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप ने रुपये की तीव्र गिरावट को रोका।’’






