नई दिल्ली: रुपये में सोमवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट आई और यह आठ पैसे टूटकर 90.28 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। मजबूत अमेरिकी मुद्रा और घरेलू शेयर बाजारों में सुस्ती से रुपये पर दबाव पड़ा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के बाद उत्पन्न हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने विश्व स्तर पर डॉलर की मांग को बढ़ावा दिया। हालांकि कच्चे तेल की गिरती कीमतों ने भारतीय मुद्रा को निचले स्तर पर थोड़ा समर्थन दिया।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, 90.21 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 90.50 प्रति डॉलर के निचले स्तर तक पहुंचा। अंत में डॉलर के मुकाबले 90.28 (अस्थायी) पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से आठ पैसे की गिरावट है। रुपया शुक्रवार को 22 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.20 पर बंद हुआ था। भारतीय मुद्रा में लगातार चौथे सत्र में गिरावट दर्ज की गई। 30 दिसंबर 2025 को यह 89.75 डॉलर प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। तब से इसमें 53 पैसे की गिरावट आई है।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक (जिंस) अनुज चौधरी ने कहा कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोमवार को रुपये में गिरावट आई।
सुरक्षित निवेश की मांग के चलते अमेरिकी डॉलर सूचकांक मजबूत हुआ, हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी और शुक्रवार को विदेशी पूंजी के प्रवाह ने रुपये को सहारा दिया।
चौधरी ने कहा कि कच्चे तेल की गिरती कीमतों से रुपये को निचले स्तर पर मजबूती मिल सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘ केंद्रीय बैंक के किसी भी हस्तक्षेप से भी रुपये को मजबूती मिल सकती है...। डॉलर के मुकाबले रुपये का हाजिर भाव 90 से 90.60 के दायरे में रहने का अनुमान है।’’
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.39 पर रहा।






