ताज़ा खबरें
एसआईआर के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन आजादी की दूसरी लड़ाई: खड़गे
जेडीयू से बाहर निकाले जाने पर अनंत सिंह बोले- बनाऊंगा अपनी पार्टी
रामलीला मैदान की रैली से पहले राहुल बोले- बीजेपी का दिल से धन्यवाद

नई दिल्ली: साल 2025 में शेयर बाजार का रुझान अपेक्षाकृत असंतुलित रहा, जिसमें छोटी और मझोली कंपनियों का प्रदर्शन बड़ी कंपनियों के मुकाबले फीका पड़ गया। पिछले दो वर्षों की तेज बढ़ोतरी के बाद उच्च मूल्यांकन और मुनाफावसूली से ये दोनों श्रेणियां दबाव में रहीं जबकि बीएसई सेंसेक्स ने स्थिरता एवं बेहतर रिटर्न दिया।

आंकड़ों के मुताबिक, मझोली कंपनियों का मानक सूचकांक बीएसई मिडकैप में इस साल 24 दिसंबर तक 360.25 अंक यानी 0.77 प्रतिशत की मामूली बढ़त ही दर्ज की गई जबकि छोटी कंपनियों का सूचकांक बीएसई स्मॉलकैप में अब तक 3,686.98 अंक यानी 6.68 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

इसके उलट बीएसई पर सूचीबद्ध 30 बड़ी कंपनियों का सूचकांक सेंसेक्स इस दौरान कुल 7,269.69 अंक यानी 9.30 प्रतिशत उछला है। इससे स्पष्ट है कि निवेशकों ने अनिश्चित वैश्विक माहौल में अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर माने जाने वाले बड़े शेयरों को प्राथमिकता दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2025 में स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों का कमजोर प्रदर्शन मुख्य रूप से 'बाजार सामान्यीकरण' का परिणाम है। इसके पहले वर्ष 2023 और 2024 में इन शेयरों ने असाधारण रिटर्न दिए थे।

ऑनलाइन ट्रेडिंग फर्म एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर. ने कहा, "वर्ष 2024 में बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक 29 प्रतिशत से अधिक और मिडकैप सूचकांक करीब 26 प्रतिशत चढ़ा था सेंसेक्स से कहीं ज्यादा था। इस तेज उछाल के कारण कई छोटी कंपनियों के शेयरों के दाम उनकी वास्तविक आय वृद्धि की तुलना में काफी ऊपर चले गए थे। लेकिन इस साल इस असंतुलन में सुधार देखने को मिला।"

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे एवं मझोले शेयर आम तौर पर घरेलू निवेशकों के पसंदीदा होते हैं जबकि विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बड़े और स्थापित कंपनियों के शेयरों पर ज्यादा भरोसा करते हैं।

वर्ष 2025 में रुपये में तेज गिरावट, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं को लेकर अनिश्चितता और एफआईआई की लगातार बिकवाली ने व्यापक बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ाया। इसका सीधा असर स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों पर पड़ा, जो तरलता, वित्तपोषण लागत और आर्थिक सुस्ती को लेकर अधिक संवेदनशील होते हैं।

 

 

  • देश
  • प्रदेश
  • आलेख