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नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पूर्वानुमान के विपरीत तीन दिन पहले ही रविवार को अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में दस्तक दे दी है। इसकी औपचारिक घोषणा रविवार को मौसम विभाग ने की। मौसम विभाग ने कहा है, दक्षिण पश्चिम पवन के मजबूत होने, लगातार बादल छाने और बारिश होने के मद्देनजर दक्षिण पश्चिम मॉनसून बंगाल की खाड़ी के दक्षिण पश्चिम के कुछ हिस्सों में, निकोबार द्वीप समूह में, समूचे दक्षिण अंडमान सागर और उत्तर अंडमान सागर के भागों पर रविवार को पहुंच गया। हालांकि, मौसम विभाग के महानिदेशक केजी रमेश ने कहा कि यह अनुमान लगाना बहुत जल्दबाजी होगी कि मॉनसून केरल तट पर तय कार्यक्रम से पहले दस्तक देगा या नहीं। केरल में मॉनसून के दस्तक देने की समान्य तारीख 1 जून है, जिसे भारत में मॉनसून के आधिकारिक रूप से आगमन की तारीख माना जाता है। रमेश ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों से यह संभावना नहीं बनती कि मॉनसून के अंडमान निकोबार द्वीप समूह जल्द पहुंचने के चलते यह समय से पहले केरल में भी दस्तक दे सकता है। दक्षिण पश्चिम मॉनसून के अंडमान निकोबार द्वीप समूह पहुंचने की सामान्य तारीख 17 मई है। निजी मौसम पूवार्नुमान एजेंसी स्काईमेट के मुख्य मौसम विज्ञानी महेश पालवत ने कहा कि मॉनसून के 1 जून से एक या दो दिन आगे पीछे केरल पहुंचने की संभावना है।

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने बुधवार को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में जमीन पर मार करने वाली ब्रहमोस क्रूज मिसाइल के आधुनिक संस्करण का बुधवार को दूसरे दिन सफल परीक्षण किया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार दक्षिण पश्चिमी कमान सट्राइक वन कोर ने भूमि पर प्रहार करने वाली क्रूज मिसाइल प्रणाली से युक्त अत्याधुनिक ब्रहमोस का लगातार दूसरे दिन सफल परीक्षण किया। लगातार सफल परीक्षण ने दुर्जेय हथियारों से मार करने की क्षमता को और मजबूत किया है। कल भी इसी स्थान से लंबी—दूरी तक मार करने वाले सामरिक हथियारों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था। उन्होंने बताया कि सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों का ये सफलतापूर्वक परीक्षण, मोबाइल टोनॉमस लॉन्चर्स से पूर्ण परिचालन अवस्था में भूमि-से-भूमि पर मार करने वाली मिसाइल के रूप में अपनी पूर्ण क्षमता के साथ किया गया। उच्च स्तर और जटिल युद्धाभ्यासों को आयोजित करते समय कॉपीबुक तरीके से सभी उड़ान मापदंडों को पूरा करते हुए, बहु भूमिका वाली मिसाइल ने भूमि आधारित निधार्िरत लक्ष्य पर वांछित सटीकता के साथ सफलतापूर्वक हमला किया। दोनों ही परीक्षणों के दौरान लक्ष्य पर हमले करने के मामले में मिसाइल की सटीकता एक मीटर से भी कम रही।

पोर्ट ब्लेयर: अंडमान के हेवलॉक और नील द्वीपों में तूफानी मौसम की वजह से तकरीबन 1400 सैलानी फंस गए हैं। उन्हें निकालने के लिए नौसेना ने बुधवार को चार पोतों को लगाया है। पोर्ट ब्लेयर से लगभग 40 किलोमीटर दूर इन दोनों द्वीपों को तूफानी मौसम ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। इस की वजह बंगाल की खाड़ी के दक्षिण पूर्व में गहरा दबाव बना गया है जिस कारण से भारी बारिश, तेज हवाएं चल रही हैं और समुद्र अशांत हो गया है। प्रशासन पहले ही तूफानी मौसम को एल1 आपदा के तौर पर की घोषित कर चुका है। अंडमान में नील और हेवलॉक बेहद लोकप्रिय पर्यटक गंतव्य स्थल हैं और सैलानियों को वहां से लाने के माध्यम पोत या हेलीकॉप्टर है जिन्होंने सोमवार रात से खराब मौसम की वजह से अभियान को रोक दिया है। दक्षिण अंडमान के उपायुक्त उदित प्रकाश राय ने कहा कि द्वीपों पर आए तकरीबन 1400 पर्यटक फंस गए हैं और अपने घर वापस जाने के लिए पोर्ट ब्लेयर आने में असमर्थ हैं। हेवलॉक और नील द्वीपों की स्थानीय आबादी तूफान से बुरी तरह से प्रभावित हुई है जिसने जरूरी चीजों की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न कर दी है। फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए भारतीय नौसेना के पोत बित्रा, बंगारम, कुंभीर एलसीयू 38 को तैनात किया गया है। निकालने का काम मौसम की प्रतिकूल स्थितियों की वजह से अभी शुरू नहीं किया जा सका है। एक रक्षा अधिकारी ने कहा कि पोत बंदरगाह के बाहर इंतजार कर रहे हैं।

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