एसआईआर के संशोधित फॉर्म-6 को हमने मंजूरी नहीं दी: सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे फॉर्म-6 के किसी भी संशोधित प्रारूप को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियोजन की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि हमने ऐसे किसी भी फॉर्म को अप्रूव नहीं किया है। यह स्पष्ट कर दें। जब रिकॉर्ड हमारे सामने आएगा तो हम देखना चाहेंगे कि इसमें बदलाव किसने किया।
मुख्य न्यायाधीश की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दावा किया गया था कि कुछ राज्यों में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान ऑनलाइन फॉर्म-6 के साथ लगाए गए नए घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी प्राप्त है। नए फॉर्म-6 में किए गए बदलाव पहले से विवाद का विषय हैं। सामने आया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने इन बदलावों पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 में केंद्र सरकार द्वारा संशोधन किए बिना ये बदलाव नहीं किए जा सकते।
दिल्ली में पैटर्न बन गया, जो महिला सवाल पूछे उसे चुप करा दो: राहुल
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नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महिला प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी को लेकर सोमवार को मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में ‘पैटर्न’’ बन गया है कि जो महिला सवाल पूछे, उसे चुप करा दो।
राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला
राहुल गांधी ने दो महिला पत्रकारों नफीसा खान और शाहीन खान के साथ बातचीत का वीडियो ‘एक्स’ पर साझा किया और सवाल किया कि गृह मंत्री अमित शाह की पुलिस महिलाओं से क्यों डरती है? पत्रकार शाहीन और नफ़ीसा ने सितंबर में आरोप लगाया था कि उन्हें एक कार्यक्रम की कवरेज के दौरान हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया, जहां उनके साथ मारपीट की गई। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए उन्हें ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ और ‘भ्रामक’ बताया था।
राहुल गांधी ने इन पत्रकारों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘दिल्ली में इस वक़्त जो हो रहा है, उसका एक ही पैटर्न है, जो औरत सवाल पूछे, उसे चुप कराओ।’’
सीईसी के निलंबन की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और ईसी को नोटिस
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नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तत्काल आदेश देने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हम न्यूज रिपोर्ट के आधार पर आदेश जारी नहीं कर सकते हैं।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका में एसआईटी जांच की मांग और एसआईआर को गैरकानूनी घोषित करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में भारत सरकार, तीनों चुनाव आयुक्त, कैबिनेट सेक्रेटरी, वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त (डीईसी) मनीष गर्ग, आईटी हेड सीमा खन्ना को नोटिस जारी किया है।
'चुनाव आयुक्तों जितना संरक्षण पीएम को भी नहीं'
याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह के वकील विकास सिंह ने कोर्ट में कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और उनके अधिकारों को लेकर कानून में अब बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा, 'सीईसी और चुनाव आयुक्तों पर उनके कार्यकाल में किए गए कामों के लिए कोई केस नहीं हो सकता। उन्हें अपने कामकाज की प्रक्रिया निर्धारित करने की भी शक्ति दी गई है।'
दिल्ली रेप: सुप्रीम कोर्ट में पुलिस को फटकार, कहा-...डर पैदा कीजिए
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नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में रेप के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि, असामाजिक तत्वों में डर पैदा कीजिए। उन्हें लगे कि अब कुछ किया तो मारे जाएंगे। दिल्ली में हुए रेप केस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के कई अधिकारी वहां मौजूद रहे।
जस्टिस पारडीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, ''सिर्फ सीसीटीवी होना जरूरी नहीं है। उसकी मॉनिटरिंग हो। क्या आपके पास वार रूम जैसी व्यवस्था है, जहां लगातार निगरानी होती हो? यह जरूरी है कि हर महिला को सुरक्षित महसूस हो। चाहे वह रात में सड़क पर पैदल चल रही हो या मेट्रो या बस में यात्रा कर रही हो।''
कोर्ट ने कहा, ''हजारों अवैध इटरीज हैं। उन पर कार्रवाई कीजिए। यहां असमाजिक तत्वों का जमघट होता है, शराब मिलती है। गैरकानूनी गतिविधियां होती हैं। बीट पेट्रोलिंग व्यवस्था को मजबूत कीजिए। असुरक्षित जगहों पर पैट्रोलिंग गाड़ी रुके।''
'जस्टिस उज्जल भुइयां की टिप्पणियों से ज्ञानेश कुमार बेनकाब': जयराम
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नई दिल्ली: कांग्रेस ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां की हालिया टिप्पणियों को लेकर निर्वाचन आयोग और उसके प्रमुख ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जस्टिस उज्जल भुइयां के बयान ने ज्ञानेश कुमार को "बेनकाब’’ कर दिया है और उन्हें अब पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में क्या लिखा?
जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक खबर साझा करते हुए दावा किया कि जस्टिस भुइयां ने मतदान के अधिकार को संविधान की मूल संरचना का हिस्सा बताते हुए जो टिप्पणी की है, उससे यह निष्कर्ष निकलता है कि संवैधानिक पद पर बैठे कुमार ने संविधान का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा, ‘‘जस्टिस भुइयां ने और भी बहुत कुछ कहा है और सीईसी को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। अगर ज्ञानेश कुमार में जरा भी शर्म है तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।’’
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