'प्रधानमंत्री ने सीईसी पर दबाव डाला', खड़गे ने मोदी से मांगा इस्तीफा
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नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘‘सत्तापक्ष को फायदा पहुंचाने’’ का आरोप लगाया और कहा कि उन पर यह सब करने हेतु "दबाव डालने" के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाया जाए।
खड़गे का ज्ञानेश कुमार से सवाल
खड़गे ने कांग्रेस कार्य समिति की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी की लड़ाई किसी दल, संस्था या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि मतदाताओं के अधिकार, संविधान और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता लोकतंत्र की सुरक्षा की पहली शर्तों में से एक है।’’ खड़गे ने सवाल किया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का फैसला किसने लिया और दो चुनाव आयुक्तों को ‘इंटरनल पोर्टल’ से बाहर क्यों रखा गया?
नंदीग्राम उपचुनावः हाईकोर्ट ने कांग्रेस उम्मीदवार को दी अंतरिम जमानत
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कोलकाता: कलकत्ता हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट के लिए होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दे दी। मिलन प्रधान को अंतरिम जमानत देते हुए जस्टिस तीर्थंकर घोष की सिंगल-जज बेंच ने साफ तौर पर कहा कि यह जमानत इसलिए दी गई है ताकि वह दूसरे उम्मीदवारों की तरह आजादी से उपचुनाव लड़ सकें और चुनाव प्रचार में हिस्सा ले सकें। जस्टिस घोष ने यह भी साफ किया कि यह अंतरिम जमानत उनके खिलाफ दर्ज सभी छह मामलों के संबंध में है।
उपचुनाव से ठीक पहले 18 सितंबर को गिरफ्तार
मिलन प्रदान, पश्चिम बंगाल में बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली तत्कालीन लेफ्ट फ्रंट सरकार के समय नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े 2007 के दो पुराने हत्या के मामलों में उपचुनाव से ठीक पहले 18 सितंबर को गिरफ्तार किए गए थे और न्यायिक हिरासत में थे। उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि 5 अक्टूबर तक थी।
अरुणाचल में असम राइफल्स के जवानों पर उग्रवादी हमला, एक शहीद
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ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले में भारत-म्यांमा सीमा के पास मंगलवार को संदिग्ध उग्रवादी हमले में असम राइफल के एक जवान की जान चली गई और चार अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि घटना नामपोंग क्षेत्र में नामपोंग नाला के पास सुबह करीब साढ़े छह बजे हुई। ‘21 असम राइफल’ के जवान उस इलाके में गश्त कर रहे थे, जहां सीमा पर बाड़ लगाने का काम किया जा रहा है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संदिग्ध उग्रवादियों ने गश्ती दल पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें हवलदार जानखोकाई कुकी (42) की जान चली गई और चार अन्य जवान घायल हो गए। घायल जवानों को इलाज के लिए ले जाया जा रहा है। उनकी स्थिति के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है।
अधिकारी ने बताया कि घटना के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया है। प्रारंभिक जानकारी में एनएससीएन (के-वाईए) से जुड़े उग्रवादियों की संलिप्तता की आशंका जताई गई है।
सीईसी के खिलाफ याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के एकतरफा फैसलों पर सवाल उठाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मामले को मंगलवार (29 सिंतबर) को सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने रखा।
उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक चुनाव आयोग में फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए। अगर एसआईआर समेत दूसरे फैसले आयोग ने सर्वसम्मति से नहीं लिए, तो यह गंभीर मुद्दा है। इसकी जांच होनी चाहिए। उनकी बातें सुनने के बाद चीफ जस्टिस ने मामले को अगले हफ्ते सुनवाई के लिए लगाने को कहा।
विकास सिंह ने कहा कि मल्टी-मेंबर कमीशन बनाने का मकसद यह था और कानून में भी यही लिखा है कि फैसला सर्वसम्मति से या बहुमत से लिया जाए। अब जिस तरह से चुनाव आयोग ने काम किया है। उसे देखते हुए इस बात पर गंभीर संदेह है कि क्या एसआईआर की पूरी प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग का कोई फैसला हुआ भी था या नहीं।
संभल हिंसा:आरोपी अफरोज की एनएसए हिरासत सुप्रीम कोर्ट ने की रद्द
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नई दिल्ली: संभल हिंसा के आरोपी मुल्ला अफरोज की एनएसए हिरासत सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी है। कोर्ट ने अवैध हिरासत के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने कहा कि अफरोज पर एनएसए लगाने का आधार पुलिस हिरासत में दिया गया कबूलनामा था। इसके आधार पर उसके दोबारा हिंसा करने या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने की आशंका बताई गई थी। पुलिस कस्टडी में कथित कबूलनामे के आधार पर एनएसए हिरासत का आदेश नहीं दिया जा सकता।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने मुल्ला अफरोज की हिरासत को रद्द कर दिया। बेंच ने कहा कि कोर्ट से बाहर किया गया कबूलनामा किसी को एहतियातन हिरासत में लेने का आधार नहीं बन सकता है। हिरासत में लेने वाले अधिकारियों को परिस्थितियों के बारे में विचार करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी को लेकर 54 दिन की देरी पर भी सवाल उठाया। बेंच ने कहा कि जब घटना के पहले दिन से ही सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध थे, तो आरोपी को गिरफ्तार करने में इतनी देर क्यों हुई।
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- 'प्रधानमंत्री ने सीईसी पर दबाव डाला', खड़गे ने मोदी से मांगा इस्तीफा
- सीईसी के खिलाफ याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
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