चुनाव आयोग और याचिकाकर्ताओं को दिया गया दस दिन का समय
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नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव आयोग के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे पर जवाब देने के लिए 10 दिन का समय दिया है। आयोग को भी अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने के लिए 10 दिन की मोहलत मिली है। मामले में अब अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई की। इसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।
ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर उठाए गए हैं सवाल
इन याचिकाओं में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि एसआईआर से जुड़े कुछ फैसले कथित तौर पर एकतरफा तरीके से लिए गए। उन्होंने चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और उसके कामकाज को लेकर भी आपत्तियां जताई हैं।
डीपीडीपी कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सरकार को नोटिस
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नई दिल्ली: डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मंगलवार को अदालत ने इस कानून और इससे जुड़े नियमों को चुनौती देने वाली डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) की याचिका पर नोटिस जारी किया। डीएनपीए ने आशंका जताई है कि कानून का असर पत्रकारों की खोजी रिपोर्टिंग और गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की। डीएनपीए की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने दलीलें पेश कीं।
खोजी पत्रकारिता और गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा का सवाल
डीएनपीए का कहना है कि डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन कानून संविधान के तहत मिले सूचना के अधिकार और बोलने व अभिव्यक्ति की आजादी जैसे मौलिक अधिकारों को सीमित कर सकता है। संगठन ने कानून के साथ-साथ इससे जुड़े नियमों को भी चुनौती दी है।
बिना घुसपैठिया मुद्दा उठाए कौन सा चुनाव लड़ती है बीजेपी?: अखिलेश
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लखनऊ: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘घुसपैठियों’ संबंधी टिप्पणी पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी राजनीतिक लाभ के लिए समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश करती है। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा जिन लोगों को घुसपैठिया बता रही है, उनकी सूची कहां है और उन्हें घुसपैठिया घोषित करने का आधार क्या है।
अखिलेश यादव ने सपा के प्रदेश मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, ‘‘कौन सा चुनाव है, जो बीजेपी घुसपैठियों के बिना लड़ती है? आप किसी को घुसपैठिया कैसे करार दे सकते हैं? आपने कहा कि बिहार में घुसपैठिए हैं, फिर मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी उनके होने की बात कही। आखिर उनकी सूची कहां है? आप उन्हें कैसे परिभाषित करेंगे?’’ समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा, ‘‘हमारे मुख्यमंत्री भी तो घुसपैठिये हो सकते हैं। हम तो अपने मुख्यमंत्री के बारे में बात कर रहे हैं। वह दूसरे प्रदेश (उत्तराखंड) से उत्तर प्रदेश आए हैं। अब लखनऊ वाले कहें कि इटावा वाले घुसपैठिए हो गए? कौन है यह तय करने वाला?’’
ज्ञानेश कुमार को हटवाइए, 30 सेकंड में रुक जाएगा आंदोलन: राहुल
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नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के व्यापारियों से एक संदेश में कहा कि कांग्रेस उनकी चिंताओं को सुन रही है, लेकिन 'वोट चोरी' का मुद्दा देश के लोकतंत्र और आम लोगों के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करते हुए कहा कि ऐसा होते ही आंदोलन 30 सेकंड में रुक जाएगा। राहुल गांधी ने यह संदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया है।
यह पोस्ट ऐसे समय आई है, जब 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित ‘चलो दिल्ली’ रैली को लेकर व्यापारियों ने चिंता जताई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली 10 नवंबर के बाद कराने की अपील की है। संगठन का कहना है कि दिवाली से पहले रैली और उससे जुड़ी यातायात पाबंदियों के कारण प्रमुख बाजारों में कारोबार प्रभावित हो सकता है।
राहुल गांधी ने व्यापारियों के नाम अपने संदेश में लिखा, "दिल्ली के हर व्यापारी से हम प्यार करते हैं, आपकी बात सुन रहे हैं। मेट्रो सरकार ने बंद की, सड़कें सरकार ने सील की, राजधानी पर ताला सरकार ने लगाया।"
मानहानि मामले में राहुल गांधी बरी, अमित शाह पर टिप्पणी का था केस
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लखनऊ: सुल्तानपुर की एक विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने मानहानि मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बरी कर दिया है। मामला तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ राहुल गांधी की कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा था। राहुल गांधी के वकील ने कहा कि दूसरा पक्ष कोर्ट में अपना आरोप साबित नहीं कर पाया। इसके बाद कांग्रेस नेता को बाइज्जत बरी कर दिया। अदालत का फैसला आने के बाद कोर्ट के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। उन्होंने ढ़ोल बजाते हुए डांस किया और अपनी खुशी जताई।
पूरा मामला 2018 का था, जिसमें बेंगलुरु में एक सम्मेलन के दौरान आरोप था कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। तत्कालीन भाजपा जिला उपाध्यक्ष विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ ये मुकदमा दर्ज कराया था।
सुल्तानपुर जिले के कोतवाली देहात क्षेत्र के हनुमानगंज निवासी विजय मिश्रा ने राहुल गांधी की टिप्पणी से आहत होने का हवाला देते हुए सुल्तानपुर की अदालत में उनके खिलाफ मानहानि का परिवाद दाखिल किया था।
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